Mythological stories in hindi -
![]() |
| कामाख्या मंदिर का रहस्य |
हेल्लो मेरे प्यारे दोस्तों आप सभी का पौराणिक कहानी में हार्दिक स्वागत है।
आप सभी को ये तो अच्छे से मालूम है की इस दुनिया में हजारो ऐसी जगह है, और जिनसे कई ऐसे किस्से है जिनको बहुत ही कम लोग जानते है।
ऐसी जगह को लोग हमेसा से ही भूतिया मानते चले आ रहे हैं और ऐसी जगह पे जाने से लोग हमेसा से ही दूर रहते हैं।
लेकिन कभी भी आपने ये सोचा है की कोई मंदिर वो भी भगवान का एक रहस्य हो सकता है। तो जी ह मेरे प्यारे दोस्तों आज मै ऐसे ही एक मदिर के बारे में आप सभी को बताने जा रहे हू जो काफी रहस्यमई है , जो की भारत में मौजूद है और लोग इस मंदिर को कमख्या मंदिर के नाम से काफी अछे तरीके से जानते है जो है गुहाटी से लगभग 8 किमी दूर निलाचल पर्वत पर मौजूद है।
ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में कई प्रकार के अलौखिक शक्ति है ।ये मंदिर 51 शक्ति पीठो में से एक माना जाता है। और यहाँ ऐसी मान्यता है की शती देवी का योनि भाग्यारथा है। और जिसके कारन यहाँ शती के योनी का देख रेख करता चला आरहा है।
शती माता के बारे में तो आप सभी अच्छे से जानते हैं, इन्होने ही भगवान् शिव से गुस्सा होकर इस दुनिया के विनाश के लिए तांडव किया था और भगवान शिव से ये भी कहा था कि वो इस पुरे ग्रहो को नस्ट कर देने की चेतावनी भी दे था।
और इसी गुस्सा में आकर भगवान् विष्णु ने माता शती के पूरे शरीर के 51 टुकरे कर दिए थे, जो इस पृथ्वी के कई दुसरे अलग अलग जगह में जाके गिरा और इन्ही टुकरे में से माता शती का योनि भाग शाम तीर्थ में आकार गिरा था।
ये वही जगह थी जहाँ माता शती भगवान् शिव के साथ अक्सर आते थे।
हिन्दू धर्म के लोग इनकी पूजा भगवान् शिव की नव वधु के रूप में करती है और ये भी माना जाता है की इनकी पूजा अर्चना करने से लोगो को मोक्ष की प्राप्ति होती है और साथ में हर इक्षा भी पूरी हो जाती है।
आपको ये बात सुनकर शायद हैरानी हो की इस मंदिर में किसी भी प्रकार की कोई भी मूर्ति या प्रतिमा नहीं है।ये मंदिर दो समतल पथरो के बिच की बिभाजन माता शती के यौनी को दर्शाता है। पास में ही एक झील होने के कारण से ये जगह हमेसा गीली रहती है जिसकी वजह से इस मंदिर को काफी शक्तिशाली माना जाता है।
कुछ लोग तो ये तक मानते हैं की इस झील के पानी को पिने से मनुष्य हर बिमारिय से आजाद हो जाते हैं ।हमारे भारत देश में औरतो के मासिक धर्म को अशुद्ध माना जाता है, लेकिन ये बात ,कामाख्या मे काम करने वाले लोगो को लेकर कुछ भी नही है।
![]() |
Ambubachi मेला |
यहाँ हर साल अम्बुवाचिका मेला लगता है और इस दौरान यहाँ का पानी लाल पर जाता है। लोग ये मानते है की ये लाल पानी काम करने वाले माता की मासिक धर्म के कारण से होता है, जिसके कुछ ही दिन बाद यहां लाखो करोड़ लोग यहां आजाते है और मासिक धर्म से गिले हुए कपड़ो को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है।
ये मेला यहाँ हर साल मनाया जाता है, जिसे महा कुम्भ भी कहा जाता है। यहाँ लाखो तांत्रिक अपने एक शांति वास से बहार आते है और अपनी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते है।
यहाँ इस मेले के दौरान ये तांत्रिक लोगो को वरदान देने के साथ साथ लोगो की सहयेता भी करते हैं। लोग ये भी मानते हैं की कोई भी तांत्रिक पूर्ण सम्पूर्ण नहीं बन सकता जब तक वो माता के आगे अपना सर न टेक ले और इस ना करने से माता नाराज हो सकती है।
यहाँ भैस और बकरे की बलि दी जाती है और ये यहाँ केलिए बिलकुल शाश्वत सी बात हैं ।लोहो का माना है की इन पसुओ की बलि देकर और भंडारा कर ने के बाद ही माता खुस होती है।
इस मंदिर में प्रवेश करते ही लोग हर शार्प से और काले जादू से छुटकारा पा लेते हैं।
तो मेरे प्यारे दोस्तों आपको ये जानकारी कैसी लगी मुझे जरुर बताइयेगा साथ ही साथ मेरे ब्लॉग MYTHOLOGICAL Story को फॉलो करना नही भूल गया।
धन्यवाद ।
You May also Like To Read
Mythological stories in hindi -
5 Truth Told By krishna to pandav in Mahabharat , महाभारत में पांडव को बताया गया 5 सत्य
हैलो मेरे प्यारे मित्रो ,आप का एक बार फिर से स्वागत है Mythological Story मे।
![]() |
5 Truth Told By krishna to pandav in Mahabharat , महाभारत में पांडव को बताया गया 5 सत्य |
दोस्तो सायद ही आपलोगो को ये मालूम हो की भगवान कृष्ण ने महाभारत के दौरान ही कलयुग युग का परिचये दे दिया था ।
जैसे : कलयुग मे लोगो का जीवन कैसा होगा, लोग कैसे होंगे ,लोग एक दूसरे से कैसा वय्वहार कैसा करेंगे ,ये सारी बाते उससी काल मे बताया जा चुका था ।
तो आज मई आपलोगो को 5 एसी सच्चाई बताने जा रहा हु ,जो भगवान कृष्ण ने कलयुग के बारे मे पांडवो को महाभारत के समय पे बताया था जो , आज 100 % सच साबित हो रही है ।
तो महाभारत के समय मे पंचो पांडवो के मन मे कलयुग के बारे मे जान ने की तीव्र इक्छा हो रही थी और उन्होने भगवान श्री कृष्ण से पूछा की आखिर कलयुग मे मानुषय कैसा होगा , उसका विचार , रहन सहन कैसा होगा और लोग मोक्ष की प्राप्ति कैसे कर पाएंगे।
तो भगवान श्री कृष्ण ने पचो पांडवो को वन मे जाने केलिए कहा और साथ ही साथ ये भी कहा की जो भी चीज़ तुमलोगों को रास्ते मे दिखे तुम मुझे सब कुछ विस्तार मे आके बताना । फिर क्या था पांचों भाई वन मे गए और कुछ देर बाद वोलोग वापस आए।
तो जब भगवान श्री कृष्ण उन्न से पूछते है की तुमलोगों ने क्या देखा , तो सबसे पहले :
1) युधिष्ठिर ने कहा :
![]() |
| 5 Truth Told By krishna to pandav in Mahabharat , |
मैंने रास्ते मे दो सुढ़ वाले हाथी को देखा , और ये देख काफी चकित हो गए , तो इस पे भगवान श्री कृष्ण ने कहा की कलयुग मे एसे लोग राज्य करेंगे जो बोलेंगे कुछ और , लेकिन करेंगे ठीक उसके विपरित यानि ठीक उसका उल्टा । ये लोग दूसरे लोगो का दोनों तरीके से शोषण करेंगे ।
2) भीम ने कहा :
मैंने एक गाय को देखा जो अपने बचो को इतना चाट रही थी की , उस बच्चे का खून निकल आया । भीम ये दृश्य देख के परेसान होगये और श्री कृष्ण से इसका मतलब पूछा ।
तो भगवान श्री कृष्ण ने मुसकुराते हुए भीम से बोले की कलयुग मे माता और पिता अपने बच्चे को इतना दुलार प्यार करेंगे की ,उसस बच्चे का विकाश ही रुक सा जाएगा ।
अगर किसी दूसरे का बेटा साधु बनता है तो लोग उसके दरसन करेंगे , लेकिन अगर खुद का पुत्र साधु बना तो दुखी हो जाएंगे । कलयुग मे लोग अपने बच्चे को मोह- माया, अपने पास ही ,करीब रखेंगे , मोह-माया मे बांध कर रखेंगे और उसका जीवन वही पे खत्म हो जाएगा ।
फिर भगवान श्री कृष्ण ने कहा की कलयुग मे उनके बच्चे उनके नहीं होंगे, बल्कि उनके पत्नियों की अमानत होंगे , और पुत्रीय उनके पतियों की अमानत है और आत्मा परमात्मा की अमानत है ।
3) अर्जुन ने कहा :
मैंने एक पंछी को देखा जिसके पंखो पर वेद की कुछ पनतिया लिखी हुई थी ,लेकिन वो किसी मनुष्य का मांश खा रहा था ।
तो भगवान श्री कृष्ण कहते है की कलयुग मे एससे लोग होंगे जिनहे ज्ञानी कहा जाएगा , लेकिन उसस वक्ती की एक ही लालसा रहगी की उसकी मृत्यु जल्दी होजाए ,जिस से की वो उसके सारे धन को अपना बना सके।
चाहे वो वक्ती कितना भी बड़ा आदमी क्यू न बन जाए लेकिन उसकी नजर हुमेसा दूसरों के धन दौलत पर रहगी ।
4) नकुल ने कहा :
एक बहुत बड़ा , भारी चटान पहाड़ से गिरा । लेकिन उस चटान को बड़े से बड़े पेड़ भी नई रोक पाये । लेकिन वही चटान एक छोटे से पौघे से टकरा कर वही रुक गयी ।
तो ईसपे भगवान श्री कृष्ण ने कहा की , कलयुग मे लोगो की मानसिकता , बुद्धि छिन होगी । और उसका जब पतन शुरू होगा तो ये धन उसकी सहायता नई कर पाएंगे , लेकिन हरीनाम नामक छोटे से पौधे से उसस मनुष्य का जीवन पतन होने से बच जाएगा । हरी कृतन से लोगो की बुद्धि प्रबल होगी ।
5) सहदेव ने कहा :
उसने वन मे कई कुए देखे ,और उन्न कुए मे से सिर्फ बीच का कुआ खाली था जो सबसे जादा गहरा था ।
तो ईसपे भगवान श्री कृष्ण ने कहा की , कलयुग मे धनी मनुस्य अपने शौख केलिए , पुत्री की सादी मे, उत्सवो मे, अपने पैसे खर्च करेंगे ।
लेकिन किसी जरूयत , भूके लोगो की मदद नही करेंगे।
लोग शराब , अपने मन की शांति , माष खाएँगे , इन्न सब मे ही अपना धन खर्च करेंगे ।
और जो लोग इन्न आदतों से दूर होंगे उन्न पर कलयुग का नहीं , बल्कि परमात्मा का आशीर्वाद होगा ।
तो मेरे प्यारे दोस्तो आपको ये जानकारी कैसी लगी मुझे जरूर बताए ।
और अपने मित्रो, परिवार, के साथ जरूर शेयर करे और Mythological Story को फॉलो करना ना भूले ।
धन्यवाद ।
You May also Like To Read
Mythological stories in hindi -
| shiva lingam stone meaning |
शिवलिंग क्या है ? क्या अपने कभी सोचा है की कैसे हुआ शिवलिंग का निर्माण ??
![]() |
| शिवलिंग क्या है ? क्या अपने कभी सोचा है की कैसे हुआ शिवलिंग का निर्माण ?? |
हैलो मेरे प्यारे मित्रो ,आप का एक बार फिर से स्वागत है Mythological Story मे।
शिव हिन्दू धर्म मे सबसे श्रेस्त माने जाते है, और उनका शिवलिंग उनका ही प्रतिक माना जाता है । जब मुग़ल का शासन था तो उन्नलोगों ने शिवलिंग को शिव की लिंग की ही संज्ञा दी ,और हिन्दू धर्म के लोगो ने बिना कोई दिकत के इससे स्वीकार कर लिया । लेकिन ये सच नहीं है---
तो चलिये मै आपको को शिवलिंग के सही तथ्य से आप सभी को अवगत कराता हू ।
हुमलोगों ने ये पढ़ा है की हर शब्द का दो या दो से अधिक मतलब होता है , वैसे ही योनि शब्द का दो अर्थ है ,
पहला -- जब कोई जीव जन्म लेता है ,तो उसके कर्मो के अनुसार उसकी एक योनि बनती है ,
दूसरा -- औरतों की जनिंदरिया ।
तो हमलोग भी जो शब्द जहाँ सही बैठता है ,हमलोग उस शब्द का प्रयोग करते है । तो इसी प्रकार से लिंग शब्द का भी दो मतलब होता है
संस्कृत मे लिंग शब्द का मतलब होता है -- किसी भी चीज़ का प्रतिक या चिन्ह
और इसलिए शिव का लिंग का मतलब होता है शिव की प्रतिमा या शिव की चिन्ह ।
तो अब आप सभी को शिव लिंग का सही अर्थ समझ आगया होगा ,और हमलोग इसकी पुजा क्यू करते है ।
शिवलीग का निर्माण शिव का शक्ति से मिलने से हुआ है ।
तो क्या अपने कभी सोचा है की कैसे हुआ शिवलिंग निर्माण ??
प्राचीन काल में ऋषि मुनि एक दीप जलाकर भगवान शिव की आराधना करते थे ,लेकिन ज्योति हमेसा हिलते रहने के कारण ध्यान लगाने मे काफी परेसनी होती थी ,टीबी उन्होने ज्योति के ही दिखने वाला एक आकार का निर्माण किया और शिवलिंग का आकार दे दिया ।
और इसीलिए शिवलिंग ज्योति का आकार है नाकी शिव जी का योनि भाग्य ।
तो मेरे प्यारे दोस्तो आपको ये जानकारी कैसी लगी मुझे जरूर बताए ।
और अपने मित्रो, परिवार, के साथ जरूर शेयर करे और Mythological Story को फॉलो करना ना भूले ।
धन्यवाद ।
और अपने मित्रो, परिवार, के साथ जरूर शेयर करे और Mythological Story को फॉलो करना ना भूले ।
धन्यवाद ।





No comments:
Post a Comment